मलयालम सिनेमा और रंगमंच की जानी-मानी अभिनेत्री सावित्री श्रीधरन का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बुधवार को कोझिकोड स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सावित्री पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से मलयालम फिल्म और थिएटर जगत में शोक की लहर है। सवित्री को खास तौर पर 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में निभाए जमीला के किरदार के लिए याद किया जाता है।
‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ से मिली अलग पहचान
सावित्री श्रीधरन ने ‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में जमीला का किरदार निभाकर दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और इस भूमिका ने उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान भी दिलाए। साल 2019 में उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी उनके अभिनय को स्पेशल मेंशन के जरिए सम्मानित किया गया। फिल्म में सावित्री का अभिनय उनकी सहजता और प्रभावी संवाद अदायगी के लिए चर्चा में रहा। इस सफलता के बाद उन्होंने मलयालम फिल्मों में काम करना जारी रखा। वह ‘वलियांगडी’, ‘डाकिनी’, ‘मेरा नाम शाजी’, ‘वायरस’, ‘इट्टिमानी: मेड इन चाइना’, ‘पाडा’ और ‘पप्पन’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रहीं।
16 साल की उम्र में शुरू किया था थिएटर का सफर
फिल्मों में पहचान बनाने से काफी पहले सावित्री श्रीधरन ने रंगमंच को अपना लिया था। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में अमेच्योर थिएटर से अभिनय की शुरुआत की। करीब दो दशक तक उन्होंने शौकिया रंगमंच पर लगातार काम किया और इसके बाद प्रोफेशनल थिएटर का रुख किया। अपने लंबे थिएटर करियर के दौरान उन्होंने केरल की कई चर्चित नाट्य मंडलियों के साथ काम किया। धीरे-धीरे वह राज्य के थिएटर समुदाय में एक सम्मानित नाम बन गईं। अभिनय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें मंच से जुड़े कलाकारों के बीच खास पहचान दिलाई।
केटी मोहम्मद के चर्चित नाटक का भी हिस्सा रहीं
सावित्री के रंगमंचीय सफर में मशहूर नाटककार के.टी. मोहम्मद के नाटक ‘दीपस्तंभम महास्चर्यम’ में काम करना भी महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इस नाटक से जुड़ने के बाद उन्होंने कई अन्य प्रसिद्ध थिएटर समूहों के साथ काम किया। उम्र बढ़ने के बावजूद रंगमंच से उनका जुड़ाव लंबे समय तक बना रहा। रंगमंच में उनके योगदान को केरल संगीत नाटक अकादमी ने भी सम्मानित किया। उन्हें केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।
अंतिम दर्शन के लिए टाउन हॉल में रखे जाएंगे पार्थिव शरीर
सावित्री श्रीधरन के पार्थिव शरीर को बुधवार 23 सितंबर को जनता के अंतिम दर्शन के लिए कोझिकोड के टाउन हॉल में रखा जाएगा। लोग दोपहर 3:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। उनके निधन के साथ मलयालम थिएटर और सिनेमा ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया है, जिसने मंच और पर्दे दोनों पर अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी।
PTI Input
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